
रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल
देहरादून एयरपोर्ट से ऋषिकेश मार्ग के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए वन क्षेत्र में 3000 से अधिक वृक्षों का कटान शुरू होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। कुछ समय पूर्व पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं राजनीतिक संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन करते हुए वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया था, लेकिन सरकार ने जनता की भावनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने आज मौके पर पहुंचकर वृक्षों के कटान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसके जंगल और प्राकृतिक धरोहर हैं, लेकिन भाजपा सरकार विकास के नाम पर अंधाधुंध वृक्षों का सफाया कर पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ने पर आमादा है।
मोहित उनियाल ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर हजारों वर्षों में तैयार हुए वन क्षेत्र को कुछ दिनों में उजाड़ा जा रहा है। यह केवल पेड़ों का कटान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य पर सीधा प्रहार है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या सड़क चौड़ीकरण का ऐसा कोई विकल्प नहीं था, जिसमें अधिकतम वृक्षों को बचाया जा सके? क्या पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया गया? यदि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, तो उनकी भरपाई केवल कागजों में नहीं, धरातल पर कब और कैसे होगी?
प्रकृति को हमारी ज़रूरत नहीं, हमें प्रकृति की ज़रूरत है।
कोविड-19 ने हमें यह कड़वा सच दिखाया कि जब सांसें संकट में पड़ती हैं, तब विकास नहीं, स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाते हैं। यदि विकास परियोजनाओं के लिए परिपक्व वृक्षों का कटान अपरिहार्य है, तो उनकी भरपाई के लिए वर्षों पहले से वृक्षारोपण और उसके संरक्षण की ठोस योजना होनी चाहिए।
मोहित उनियाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी, तो कांग्रेस जनमानस, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी। उत्तराखंड की हरियाली और प्राकृतिक विरासत को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा।



