उत्तराखंडदेहरादूनपर्यटन

पहाड़ों की खाली पड़ी जमीन को आबाद करेगी लैंड पुलिंग स्कीम, जमीन के बदले विकसित जमीन

रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल

देहरादून, उत्तराखंड के खाली होते गांव के गांव आज भी पलायन की ओर अग्रसर है मैदानी इलाकों में जनसंख्या घनत्त्व बढ़ता जा रहा है और पहाड़ खाली होते जा रहे है राज्य सरकार का फोकस खाली होते गांव में रिवर्स पलायन पर है जिसके लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं धरातल पर उतारी गई है, अब बंजर हो गई जमीन को फिर से आबाद करने के लिए सरकार ने लैंड पुलिंग का फैसला लिया है जिसका नतीजा आने वाले समय में दिखाना शुरू हो जाएगा, आइए जानते है विस्तार से भूमि पुलिंग के फायदों के बारे में जिस से एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ आबाद होंगे .  ..

उत्तराखंड सरकार अब सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए जमीन के बदले विकसित जमीन और मालिक को आजीविका भत्ता भी देगी। बुधवार को धामी कैबिनेट ने भूमि पूलिंग नियमावली 2025 पर मुहर लगा दी। इसके तहत जमीन लेकर प्राधिकरण विकसित करेंगे। उसका एक हिस्सा मालिक को लौटा देंगे और बाकी को बेचा जा सकेगा।
अभी तक प्रदेश में भूमि अधिग्रहण की जो परंपरागत प्रक्रिया है, उसकी जगह भूमि पूलिंग से साझेदारी आधारित विकास मॉडल तैयार होगा। इसमें जमीन का मालिक अपनी जमीन देकर बदले में विकसित प्लॉट और आर्थिक लाभ ले सकेंगे। इस नीति के तहत भूमि मालिक स्वेच्छा से अपनी भूमि को सरकार या प्राधिकरण को विकास के लिए सौंपेंगे।
विकसित होने के बाद, उन्हें भूमि का एक निर्धारित हिस्सा रिहायशी और व्यावसायिक प्लॉटों के रूप में वापस दिया जाएगा। बची जमीन को प्राधिकरण लीज पर दे सकेंगे या फिर बेच भी सकेंगे। प्रमुख सचिव आवास आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि इससे प्रदेश में शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा। प्राधिकरण जमीन को लेकर विकसित करेंगे। इसका मकसद लाभ कमाना नहीं बल्कि सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना है।
जिन लोगों के नाम जमीन है, उन्हें उनकी जमीन में से 24 प्रतिशत तक विकसित रिहायशी प्लॉट, सात प्रतिशत विकसित कॉमर्शियल प्लॉट मिलेगा। कॉमर्शियल प्लॉट न लेने पर 14 प्रतिशत अतिरिक्त रिहायशी प्लॉट मिलेंगे। साथ ही विकसित प्लॉट न देने की स्थिति में रिहायशी प्लॉट पर दोगुना, कॉमर्शियल प्लॉट पर तीन गुना सर्किल रेट के बराबर राशि मिलेगी।

-ऐसी जमीन, जिसे कानूनी तौर पर किसी अन्य के नाम नहीं किया जा सकता, उनके मालिकों को जमीन विकसित कराने की सूरत में 22 प्रतिशत रिहायशी और छह प्रतिशत कॉमर्शियल जमीन मिलेगी।
इन सभी को गैर कृषि भूमि होने पर 12 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिमाह, कृषि भूमि होने पर छह रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिमाह आजीविका भत्ता मिलेगा। यह अधिकतम तीन साल तक दिया जाएगा, जिसका भुगतान तीन वार्षिक किस्तों में होगा। इसका अग्रिम भुगतान 25-30 प्रतिशत किया जाएगा।

-छोटे भूमि मालिकों को 250 वर्गमीटर से कम भूमि होने पर सर्किल रेट के हिसाब सो नकद मुआवजा मिलेगा।

-योजना के तहत सूचना जारी होने से लेकर अंतिम प्रमाणपत्र तक 13 चरण तय किए गए हैं। 90 दिन में बेस मैप व ड्राफ्ट लेआउट तैयार होगा। 15 दिन में आपत्तियों की सुनवाई होगी। अंतिम लेआउट का प्रकाश 15 दिन में होगा। अधिग्रहित भूमि का हस्तांतरण 30 दिनों में होगा। सभी रिकॉर्ड अपडेट करने और पुनर्गठित प्लॉट जारी करने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की होगी।

Related Articles

Back to top button