
रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल
भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स अपने चार साथियों के साथ मंगलवार देर रात 3:27 बजे पृथ्वी पर लौट आईं। वे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर 9 महीने 14 दिन तक रहीं।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से उन्हें पृथ्वी पर लौटने पर 17 घंटे का वक्त लगा। स्पेसक्राफ्ट के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर इसका तापमान 1650 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो गया था। इस दौरान करीब 7 मिनट के एस्ट्रोनॉट्स से संपर्क टूट गया।
नासा की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बुधवार (19 मार्च) को धरती पर लौटें, सुनीता और बुच विल्मोर की वापसी का यह सफर करीब 17 घंटे का होगा. दोनों एस्ट्रोनॉट SpaceX क्रू कैप्सूल में समंदर में लैंड किया ,इस कैप्सूल को खोलने के बाद एस्ट्रोनॉट्स को स्ट्रेचर पर लाया जाएगा.दरअसल स्पेस में महीनों बिताने के बाद एस्ट्रोनॉट्स अचानक चल नहीं सकते. उनके शरीर में कई बदलाव भी हो जाते हैं, जिससे बैलेंस और मसल्स पर असर पड़ता है. दरअसल धरती पर ग्रैविटी हमारे शरीर को कंट्रोल में रखती है, लेकिन स्पेस में ऐसा नहीं होता. इसीलिए जब सुनीता विलियम्स और बुल विल्मोर धरती पर आएंगे तो उन्हें स्ट्रेचर पर रखा जाएगा ।