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ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना का काम पकड़ेगा जोर, याचिका खारिज कोई कानूनी उलंघन नहीं

रोड निर्माण में 754 पेड़ों को पूरी तरह काटने के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से सुरक्षित रूप से दूसरी जगह किया जाएगा प्रत्यारोपित

रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल

देहरादून/नैनीताल, हाई कोर्ट ने पर्यावरणविदों की ओर से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना के लिए की जा रही पेड़ों की कटाई कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से किसी भी अदालती आदेश की अवहेलना नहीं की गई है और वर्तमान में इस परियोजना पर कोई अंतरिम रोक या प्रतिबंध लागू नहीं है।

इस परियोजना के मार्ग में आने वाले कुल 4,639 पेड़ों को हटाने के लिए चिह्नित किया गया है। एनएचएआई ने कोर्ट को बताया था कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधते हुए कुल 754 पेड़ों को पूरी तरह काटने के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से सुरक्षित रूप से दूसरी जगह प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) करेगा।

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन हाईवे प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बड़ी राहत मिली है और अब पेड़ों की कटाई पर कोई अंतरिम रोक न होने के कारण निर्माण कार्य निर्बाध रूप से जारी रहेगा।

हाई कोर्ट के स्पष्टीकरण के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण पर कोई कानूनी रोक नहीं है। एनएचएआई (NHAI) का कहना है कि यह परियोजना पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण (जैसे हाथियों के लिए विशेष अंडरपास और ट्रांसप्लांटेशन) को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, इन सभी सुरक्षा उपायों का खाका वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार किया गया है और इसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां पहले ही प्राप्त की जा चुकी हैं। याचिका को खारिज किए जाने के बाद अब इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में आ रही अंतिम कानूनी बाधा भी पूरी तरह समाप्त

हो गई है।

 

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