नगरासू गुरुद्वारा विवाद में 24 घंटे बाद भी नहीं निकला समाधान, छत पर डटे निहंग, देखिये पूरी वीडियो रिपोर्ट…

रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल
रुद्रप्रयाग, बीते मंगलवार को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों और स्थानीय युवकों के बीच हुए विवाद के बाद तनाव लगातार बना हुआ है. जानकारी के अनुसार शनिवार देर शाम पंजाब से आये कुछ निहंग सिखों ने कर्णप्रयाग से आगे, रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारा पर कब्जा कर लिया है और वहां एक सेवादार को बंधक बना लिया है. सूत्र बताते हैं कि निहंग सिखों की शिकायत ये है कि गुरुद्वारा मैनेजमेंट ने कर्णप्रयाग की घटना पर खुलकर निहांगो का स्टैंड नहीं लिया।
जिस सेवादार को निहंग सिखों ने शनिवार को पकड़ लिया था वो अभी भी उन्हीं के कब्जे में है. इस बीच क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को रोक दिया गया है और ITBP के साथ ही PAC की टुकड़ी तैनात की गई है. वहीं कर्णप्रयाग, जहां झगड़े की शुरुआत हुई थी. वहां प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है, जो एक जगह पर लोगों के इक्कठा होने को प्रतिबंधित करती है।
गौरतलब है कि रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में चल रहे निहंग सिख विवाद का 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया है। गुरुद्वारे की छत पर चढ़े निहंग सिख अब भी अपने रुख पर कायम हैं, जिससे प्रशासन, गुरुद्वारा प्रबंधन और स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
मामले को लेकर गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने पत्रकार वार्ता कर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि छत पर चढ़े लोग वास्तविक और मान्यता प्राप्त निहंग सिख नहीं हैं। उनका कहना है कि असली निहंग सिख किसी पंजीकृत संगठन अथवा समिति से जुड़े होते हैं, जबकि यहां मौजूद लोगों का किसी अधिकृत संस्था से संबंध नहीं है।
बेहंत सिंह ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम से क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि गुरुद्वारे में मौजूद एक लगभग 60 वर्षीय श्रद्धालु को बंधक बनाकर रखा गया है, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने फोन के माध्यम से छत पर मौजूद निहंग सिखों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार छत पर डटे निहंग सिख 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई घटना के बाद जेल भेजे गए तीन निहंग सिखों की रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं।
गुरुद्वारा प्रबंधन का कहना है कि इस घटनाक्रम का सीधा असर श्रद्धालुओं पर पड़ रहा है। सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन 10 से 12 हजार श्रद्धालु मत्था टेकने और लंगर ग्रहण करने पहुंचते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति के चलते गुरुद्वारे में आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। इससे लंगर के लिए तैयार किया गया खाद्य सामग्री भी खराब होने लगी है और धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
वहीं, घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक विवाद का कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ सका था।
फिलहाल नगरासू गुरुद्वारा विवाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



