उत्तराखंड के ऋषिकेश की रहने वाली मीनाक्षी भाटिया ने अपने पहले ही प्रयास में उत्तराखंड पीसीएस (PCS) परीक्षा पास कर एसडीएम बनी (SDM)

रिपोर्ट — कृष्णा रावत डोभाल 
कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो मेरे यारो,जब हौसले बुलंद हो तो मेहनत रंग लाती है आज कामयाबी की एक अलग शख्सियत से आपको रूबरू करवा रहे है
ऋषिकेश — हाल ही में उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा के परिणाम घोषित हुए जिसमें ऋषिकेश की रहने वाली मीनाक्षी भाटिया ने अपने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर sdm बनी कौन है मीनाक्षी भाटिया क्या है उनके संघर्ष की कहानी कैसे टिफीन पहुंचाने से लेकर एसडीएम की कुर्सी तक का सफर तय किया ,
जब मीनाक्षी महज डेढ़ वर्ष की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां नीलम भाटिया ने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए टिफिन सर्विस शुरू की। मीनाक्षी और उनकी बड़ी बहन शिल्पा लोगों के घरों के साथ-साथ तहसील कार्यालय में भी पैदल जाकर टिफिन पहुंचाती थीं। आज उसी तहसील प्रशासन की कमान मीनाक्षी संभालेंगी।
मीनाक्षी ने 2020 में बीकॉम में यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल हासिल किया था। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के, केवल सेल्फ-स्टडी और टेस्ट सीरीज के जरिए यह सफलता प्राप्त की। तैयारी के दौरान उन्होंने चार साल तक इंटरनेट का सिर्फ अति-आवश्यकता में सीमित उपयोग किया।
इससे पहले वे यूपीएससी (UPSC) के इंटरव्यू तक पहुंची थीं, लेकिन 5 अंकों से चयन से चूक गई थीं। मीनाक्षी की बड़ी बहन शिल्पा भी दो साल पहले उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा पास कर चुकी हैं और वर्तमान में सांख्यिकी अधिकारी के पद पर तैनात हैं।



