बड़ी ख़बर कुंभ 2026 की तैयारी हरिद्वार में 20 अक्टूबर से 8 नवंबर तक बंद रहेगी ऊपरी गंगा नहर

रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल
हरिद्वार, अगर आप गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है,20 अक्टूबर मध्य रात्रि से हरिद्वार गंगा स्नान करने आने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है क्या है कारण लिए आपको बताते हैं आप खबर विस्तार से…
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा संचालित गंगनहर को वार्षिक सफाई और मरम्मत कार्यों के लिए आज रात 12 बजे से बंद किया जाएगा। परंपरा के अनुसार, दशहरे के आसपास गंगनहर में जल प्रवाह रोककर उसकी सफाई और आवश्यक मरम्मत की जाती है। इसके बाद दीपावली के अवसर पर 7 नवंबर को गंगनहर में दोबारा पानी छोड़े जाने की बात कही गई है। गंगनहर बंद होने की इस अवधि में हरिद्वार में आगामी कुंभ मेला-2027 की तैयारियों से जुड़े कुछ आवश्यक कार्य भी किए जा सकेंगे।
गंगनहर हरिद्वार से निकलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक क्षेत्रों तक सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए पानी पहुंचाती है। इसका जल प्रवाह कृषि, स्थानीय जल प्रबंधन और विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में गंगनहर की वार्षिक बंदी का असर हरिद्वार से लेकर नहर पर निर्भर आगे के क्षेत्रों तक महसूस किया जाता है।
सफाई और मरम्मत के लिए रोका जाएगा जल प्रवाह….
गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान नहर के तल में जमा गाद, मिट्टी और अन्य अवांछित सामग्री को हटाने के साथ-साथ आवश्यक मरम्मत का काम किया जाता है। नहर के विभिन्न हिस्सों की स्थिति का निरीक्षण कर उन स्थानों पर सुधार कार्य भी किए जा सकते हैं, जहां मरम्मत की आवश्यकता होती है।
इस अवधि में हरिद्वार में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों से संबंधित प्रस्तावित कार्यों को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिल सकता है। कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के मद्देनजर घाटों, आसपास के क्षेत्रों और संबंधित व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए समय रहते काम पूरा करना महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि गंगनहर बंद होने का सबसे अधिक असर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं पर दिखाई देता है। हर की पैड़ी पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-पाठ, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। गंगनहर में पानी का प्रवाह रुकने से घाटों पर सामान्य दिनों की तुलना में जल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
गंगनहर बंद होने का सबसे अधिक असर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं पर दिखाई देता है। हर की पैड़ी पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-पाठ, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। गंगनहर में पानी का प्रवाह रुकने से घाटों पर सामान्य दिनों की तुलना में जल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।



