प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयास से राज्य सरकार मौन पालन को रोजगार की दिशा में उत्तराखंड के गांव गांव में स्थापित करेगी
विश्व में तेजी से बढ़ रही है हिमालय के उत्पादित शहद की खपत, राज्य सरकार में ज्योलिकोट के शहद को जीआई टैग की शुरू की कवायद

रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल
ऋषिकेश , प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के मधुग्राम के सपने को लेकर उत्तराखंड मौन परिषद के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल ने ऋषिकेश श्यामपुर, आईडीपीएल और यमकेश्वर विधानसभा के कुनाऊ गांव में राजकीय मौन पालन परिषद के तत्वावधान में बहु दिवसीय मधुमक्खी पालन (मौन पालन) प्रशिक्षण से स्वरोजगार की दिशा में क्षेत्रवासियों को प्रेरित कर, अलग अलग क्षेत्र बहुदिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त कर मधुमक्खी पालन और शहद से रोजगार के क्षेत्र में विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त करी, शिविरो के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों को घमंडपुर स्थित एकस्थापिति मधुमक्खी पालन केंद्र का भ्रमण कराया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को व्याक्हारिक जानकारी दी गई।
उत्तराखंड मौन परिषद के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल ने इन शिविरों का शुभारंभ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कृषि मंत्री गणेश जोशी के विशेष प्रयास से उत्तराखंड सरकार राज्य के विशिष्ट शहद, विशेषकर नैनीताल के ज्योलीकोट शहद, को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने के लिए प्रयासरत है ताकि इसकी शुद्धता और औषधीय गुणों को वैश्विक पहचान मिल सके। यह प्रयास राज्य के शहद उत्पादन को बढ़ावा देने और मधुमक्खी पालकों की आय बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

जिसके अंतर्गत मधुमक्खी के व्यवहार,उनके प्रकार और शहद उत्पादन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझा विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है,जिसमें कम लागत में बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। यह न केवल स्वरोजगार का सशक्त माध्यम है, बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
मधुमक्खियां परागण की प्रक्रिया फसलों की उत्पादकता बढ़ाने मेंमहत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।प्रतिभागियों को शहद निकालने की वैज्ञानिक विधि, बॉक्स की देखरेख,मौसम के अनुसार प्रबंधन, रोग नियंत्रण तथा रानी मधुमक्खी के संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में गंगा भोगपुर, कुनाऊ, गुमानीवाला, श्यामपुर, वीरभद्, रायवाला सहित विभिन्न क्षत्रो से आए प्रशिक्षणार्थी शमिल हुए । सभी ने प्रशिक्षण को उपयोगी और प्रेणादायक बताया । मौके पर मंत्री के जनसंपर्क अधिकारी राघव शर्मा विशेषज्ञ विजेंद्र सिंह पंवार, चंदर मोहन नेगी, प्रधानाचार्य राजीव लोचन, अश्वनी भट्ट, अनूपरावत, शीतल विष्ट, सुपमा नेगी ओम प्रकाश गुप्ता, अर्चना पांडे, निश, रखना चह्म,गीता, मंजू, बरखा एवं दिनेश सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
राज्य मंत्री गिरीश डोभाल ने प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते कहा कि मधुमक्खी पालन वर्तमान समय में रोजगार का एक प्रभावी और लाभकारी विकल्प वनकर उभर रहा है। कहा कि युवा यदि इस दिशा में गंभीरता से कार्य करें तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयास से राज्य सरकार द्वारा इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्यमंत्री गिरीश डोभाल ने प्रतिभागियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देते अधिक से अधिक लेगों को इस व्यवसाय से जुड़ने का आह्मन किया।
भ्रमण के दौरान प्रशिक्षण लेनेवालों ने स्वयं मधुमक्खी केबक्सों का निरीक्षण किया औरविशेषज्ञों से सीधे संवाद करअपनी जिज्ञासाऔं का समाधानकिया। उन्हें बताया गया कि एकस्वस्थ रानी मधुमक्खी पूरे छत्तेकी उत्पादकता का आधार होतीहै। यदि रानी स्वस्थ और सक्रियहै तो शहद उत्पादन भी बेहतरहोता है। सथ ही यह भी बतायागया कि किस प्रकारसवधानीपूर्वक शहद निकालाजाता है ताकि मधुमत्खियों कोकिसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।विशेषज्ञों ने यह भी स्यष्ट कियाकि मधुमक्खी पालन के लिएअत्यधिक भूमि या बड़े संसाधनोंकी आवश्यकता नहीं होती।ग्रामीण क्षेत्रोंमें रहने वालेकिसान, महिलाएं और युवा कमस्थान में भी इसे प्रारंभ कर सकतेहैं। सही प्रशिक्षण और तकनीकीमार्गदर्शन से यह व्यवसाय स्थायी आय का स्रोत बन सकता है।



