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उत्तराखंड में 4 सीनियर IPS अधिकारियों के तबादले,

 

रिपोर्ट — कृष्णा रावत डोभाल

देहरादून — हरिद्वार में होने वाले कुंभ 2027 की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। उत्तराखंड सरकार ने मेले के बेहतर संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को कुंभ मेले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार का फोकस साफ है। भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल देना।

 

हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले 2027 को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार सरकार किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती। इसलिए कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए बड़े अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। इसी क्रम में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी योगेंद्र सिंह रावत को कुंभ मेले का पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। वहीं आयुष अग्रवाल को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कुंभ मेला की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें टिहरी जिले से ट्रांसफर करके इस अहम पद पर भेजा गया है। हरिद्वार कुंभ को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी सरकार का मानना है कि कुंभ जैसे विशाल आयोजन में उच्च स्तर के अधिकारियों की तैनाती से व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से संचालित हो सकेंगी। IG स्तर का अधिकारी विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच तालमेल बनाने का काम करेगा। जबकि SSP जमीन पर रहकर सुरक्षा, ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालेगा। सीसीटीवी ड्रोन और कंट्रोल रूम के जरिए होगी मेले की निगरानी कुंभ मेले में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल करेगी। CCTV, ड्रोन और कंट्रोल रूम के जरिए पूरे मेले की निगरानी की जाएगी। साथ ही VIP मूवमेंट और ट्रैफिक व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से मैनेज किया जाएगा। इनको मिली नई जिम्मेदारी इसके अलावा प्रशासनिक फेरबदल भी किए गए हैं। आईपीएस अधिकारी श्वेता चौबे को टिहरी का नया SSP बनाया गया है। वहीं विशाखा अशोक भदाणे को नई जिम्मेदारी देते हुए IRB द्वितीय में सेनानायक नियुक्त किया गया है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि कुंभ मेला शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। इसके लिए अधिकारियों को पहले से जिम्मेदारी देकर तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है। ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और मेले का आयोजन सफलतापूर्वक हो सके।

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