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ऋषिकेश बसंत महोत्सव में मिट्टी की खुशबू में दिखा पहलवानों का हुनर, दंगल ने पूरा किया 40 सालों का सफ़र

रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल

ऋषिकेश, ऋषिकेश के बसंतोत्सव 2026 आज का दिन खास रहा जिसने पुरानी यादों को ताजा कर दिया जब मनोरंजन के सीमित साधन थे और युवा अपनी सेहत और दमखम पर विशेष ध्यान देते थे, मिट्टी के अखाड़े में ये दमखम ओर निखरता था जी हा हम बात कर रहे है भारतीय कुश्ती की जिसकी रौनक बसंत महोत्सव के दूसरे दिन दंगल में देखने को मिली और साथ ही बैडमिंटन प्रतियोगिताओं की भी शुरूआत भी हुई। बुधवार को दंगल प्रतियोगिता ने आयोजन की सफलता के 40 वर्ष पूरे ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया। इस दौरा हुएन बड़ी संख्या में खेलप्रेमियों ने पहलवानों के दांव-पेंच का आनन्द उठाया।दंगल के पहले दिन 20 कुश्तियां लड़ी गई।

 

हरिद्वार मार्ग स्थित भगतराम ग्राउंड पर आयोजित दंगलप्रतियोगिता का शुभारंभ दंगल के अध्यक्ष विनय उनियालऔर पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा द्वारा पहलवानों सेपरिचय के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि दंगल प्रतियोगिता ऋषिकेश की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

प्रतियोगिता के पहले दिन लड़ी गई कुश्तियों में समीर(देहरादून), सुमित (कलियर), अड्डा (सहारनपुर ), सुर(बागपत ), नितिश (ऋषिकेश), सुनील (रामपुर), नितिश (ऋषिकेश), सुनील (रामपुर), काला(देहरादून), आर्यन ( मुरादाबाद), अन्ू (रुड़की) और प्रिंस(बिजनौर) ने अपने प्रतिद्धंदियों को अखाड़े में पटखनीदी। विजयी पहलवानों को हजारों रुपये की नकद राशि वपुरस्कार से सम्मानित किया गया।

 

प्रतियोगिता में उत्तराखंड के ऋषिकेश (रामचरणअखाड़ा), देवप्रयाग, देहरादून और हरिद्वार के साथराजस्थान, पानीपत, दिल्ली, मुजफ्फरनगर औरसहारनपुर के नामी पहलवानों ने प्रतिभाग किया। मैदान पर मुख्य रेफरी रामप्रसाद भारद्वाज (ऋषिकेश) व सहायक रेफरी चरण पहलवान ने अहम की भमिका निभाई।

 

मौके पर दंगल संयोजक जयप्रकाश ठेकेदार और भुवनेश्वर प्रसाद भारद्वाज का विशेष सहयोग रहा। बतायागया कि 22 जनवरी को प्रतियोगिता का फाइलन मुकाबला खेला जाएगा।

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