
ऋषिकेश , मधुवन आश्रम को लेकर एक बार फिेर से सवाल उठने लगे हैं। ट्रस्ट के स्वामित्व को लेकर दो पक्षों का झगड़ा एक बार फिर सामने आ गया है, इस्कॉन से आए प्रतिनिधि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष मीडिया के आगे रखा, मधुबन आश्रम के ट्रस्टी हरिकृष्ण दास और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य पदाधिकारियों ने आरोप लगाए कि कुछ लोग व्यवस्था में गैरकानूनी तरीके से काबिज होने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से नाकार दिया है।

एक बार फिर मुनि की रेती स्थित मधुवन आश्रम को लेकर विवाद सामने आया है।खुद को आश्रम का ट्रस्टी बताने वाले हरिकृष्ण दास ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर कई आरोप लगाए। हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि आश्रम में तड़के पांच बजे होनेवाली मंगला आरती में श्रद्धाल्ओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।उन्होंने यह भी दावा किया कि आश्रम इस्कॉन वृंदावन ट्रस्ट की संपत्ति है और वहां आने वाले लोगों को रोका जा रहा है। हरिकृष्ण दास के अनुसार, वर्ष 1988 में मुनि की। रेती में यह संपति ट्रस्ट द्वारा आश्रम केलिए खरीदी गई थी, लेकिन वर्तमान में इसका संचालन ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।उन्होंने कुछ व्यक्तियों के नाम काउल्लेख करते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात भीकही। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने आश्रम के प्रबंधन की जिम्मेदारीकाउंसिल ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट को सौंपी हुई है। इस्कॉन संबंधितमथुवन आश्रम को लेकर ट्रस्टी हरिकृष्ण दास, मंधुवन टेंपल केअध्यक्ष, राधेश लाल, व्यवस्था प्रबंधक से जुड़े हितेश शर्मा, एडवोकेटतुषार भटनागर और कृष्ण चंद ने मधुवान आश्रम की स्थापन औरइसके संचालन से जुड़े तथ्य मीडिया के सम्मुख रखे। बताया कि मौजूदासमय में मधुवन आश्रम की तमाम व्यवस्थाए इस्कॉन की गाइड लाइन के मुताबिक नहीं चल रही हैं। धर्मावलंबी इससे चिंतित हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि ट्रस्ट द्वारा नियुक्त स्वामी द्वारा सेवा में रखे गए कुछ लोग आश्रम की व्यवस्थाओं को अपने हाथों में लेने का प्रयास कर रहे हैं। इसको लेकर कई बार आपत्ति भी व्यक्त की जा चुकी किसी प्रकार का विवाद न हो इसके लिए ट्रस्टी कानून के तहत आगे बढ़ रहे हैं । इससे जुड़े विवादों के कानूनी स्टेटस के बारे में पुलिस और प्रशासन को भी अवगत कराया जा चुका है। मुबंई में पंजिकृत ट्रस्ट के अधीन मधुवन आश्रम आता है। ये आश्रम देश भर में इस्कॉन के तहत आने वाले 200 आश्रमों में से एक है। कहा कि आश्रम को लेकर धर्मानुरागियों के बीच अच्छा संदेश जाए इसके लिए ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी और इस्कॉन के साधक लगातार प्रयास कर रहे हैं। वही ट्स्ट ने आश्रम के प्रबंधन की जिम्मेदारी काउंसिलऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट को सौंपी हुई है। प्रेसवार्ता में राघेश लाल,हितेश शर्मा, तुषार भट्टनागर और कृष्ण चंद अदल भी मौजूद रहे।
वहीं आश्रम के प्रबंधक हर्ष कौशल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि नरेंद्रनगर में दर्ज एक मुकदमे में दिसंबर माह में आश्रम पक्ष को जीत मिल चुकी है, जबकि टिहरी स्थित अदालत में एक अन्य सिविल मामला अभी विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि आश्रम पर लगाए जा रहे आरोप बेवजह हैं और श्रद्धालुओं के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं है।



