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परमार्थ की आरती वर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में

ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन की आरती को वर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड से मिला सम्मान

 

रिपोर्ट _कृष्णा रावत डोभाल

ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन की आरती को वर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड से मिला सम्मान

 

ऋषिकेश, उत्तराखंड सदियों से मानव जाति को प्रकृति के साथ आलौकिक जीवन की प्रेरणा देता रहा है। यह क्षेत्र शोध, साधना, अध्यात्म, ज्ञान और विज्ञान का संगम स्थल रहा है। देवों की भूमि उत्तराखंड में लोग अध्यात्म की तलाश में आते है। ऋषिकेश तीर्थनगरी में लोग गंगा आरती करने आते है और यहां की गंगा आरती पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखती है, यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय योग नगरी के रूप में विख्यात ऋषिकेश परमार्थ निकेतन की आरती को देखने के लिए बड़ी संख्या में देसी विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं और अब इस परमार्थ निकेतन गंगा घाट पर होने वाली गंगा आरती को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स लंदन (यूके) में सूचीबद्ध पुरस्कृत किया गया है।

परमार्थ निकेतन में शाम होते ही देश-विदेश से कई सेलिब्रिटी और राजनेता परमार्थ निकेतन गंगा घाट पर होने वाली गंगा आरती के लिए पहुंचते हैं। बताया जा रहा है कि गंगा आरती को 30 मिनट की नॉनस्टॉप दैनिक मनमोहक आरती के रूप में सूचीबद्ध कर पुरस्कृत किया गया है। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अधिकारियों ने इस संबंध में स्वामी चिदानंद सरस्वती को प्रमाण पत्र तथा पुरस्कार प्रदान किया। बताया जा रहा है कि परमार्थ निकेतन पहुंचे वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकारियों अभिषेक कौशिक तथा प्रिया शर्मा ने स्वामी चिदानंद सरस्वती व साध्वी भगवती सरस्वती को रिकॉर्ड में लिस्टिंग का प्रमाण पत्र व अवॉर्ड प्रदान किया।

आपको बता दें कि परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने वर्ष 1997 में गंगा आरती शुरू की थी।इसी तर्ज पर वर्ष 1998 में स्वामी चिदानंद सरस्वती के नेतृत्व में नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर के समक्ष बागमती नदी के किनारे एक विशाल गंगा आरती आयोजित की गई। करीब 28 वर्षों से परमार्थ निकेतन प्रतिदिन चलने वाला एक अद्भुत दैनिक पर्यावरण के प्रति जागरण का अनुष्ठान बन गया है और आज इसी की आवश्यकता भी है कि जल क्रांति जन क्रांति बने, जल अभियान जन अभियान बने, जल मिशन जीवन मिशन बने।

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