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उत्तराखंड में निकाय चुनाव के लिए अधिसूचना जल्द ही

99 नगर निकायों में चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने की तैयारी, कब है तारीख पढ़े पूरी खबर

 

रिपोर्ट _कृष्णा रावत डोभाल

देहरादून , हाई कोर्ट के जवाब तलब के बाद उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव के लिए सरकार भी तैयार है , जिसके लिए सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया गया है ।

भाजपा जुटी तैयारी में….

भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनाव के लिए कमर कस ली है। पार्टी जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश के लिए 10 मई से प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ के तहत पार्टी टीमों का गठन करेगी और जिन्हें नामों का पैनल तैयार करने के लिए फील्ड में भेजा जाएगा। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के मुताबिक,राज्य में निकाय चुनाव जल्द होने की संभावना है। पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए पहले से तैयारी कर रही है। पार्टी को पूरा भरोसा है कि सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भाजपा जीत दर्ज करेगी।

उत्तराखंड में सरकार के रुख से साफ है कि 15 मई से पहले 99 नगर निकायों में चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो सकती है। राज्य में वर्तमान में 102 नगर निकाय कार्यरूप में परिणत हैं जिनमें से तीन में चुनाव नहीं होते।लोकसभा चुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद उत्तराखंड में नगर निकायों के चुनाव की तैयारी है। हाईकोर्ट में दिए गए 30 जून तक चुनाव संपन्न कराने के शपथ पत्र की भावना के अनुरूप शासन इसकी तैयारियों में जुट गया है

निकायों में ओबीसी (अदर बैकवर्ड क्लास) के लिए आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत के स्थान पर वास्तविक संख्या के आधार पर करने समेत अन्य बिंदुओं को लेकर नगर निकाय अधिनियम में संशोधन के दृष्टिगत वित्त, कार्मिक व न्याय विभाग से परामर्श मांगा गया है। इसके बाद चुनाव आयोग से अनुमति मिलने पर अध्यादेश के जरिये सरकार अधिनियम में संशोधन कर सकती है और इसी आधार पर निकाय चुनाव होंगे।

15 मई से पहले जारी हो सकती है अधिसूचना…

जैसे संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि 15 मई से पहले 99 नगर निकायों में चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो सकती है। राज्य में वर्तमान में 102 नगर निकाय कार्यरूप में परिणत हैं, जिनमें से तीन में चुनाव नहीं होते। नए बने आठ अन्य नगर निकायों के चुनाव बाद में कराए जाएंगे। राज्य में नगर निकायों का पांच वर्ष का कार्यकाल पिछले वर्ष दो दिसंबर को समाप्त होने के बाद जब चुनाव की स्थिति नहीं बनी तो इन्हें प्रशासकों के हवाले करदिया गया।

 

 

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