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यात्रा या पिकनिक, धार्मिक पर्यटन से बढ़ी चिंता

बद्रीनाथ केदारनाथ में बढ़ती भीड़ को लेकर संतो में नाराजगी , धार्मिक पर्यटन और पर्यटन को अलग करने की मांग सरकार दोनो पर्यटन के लिए बनाए अलग मंत्रालय

 

रिपोर्ट _ कृष्णा रावत डोभाल

ऋषिकेश , मानसून की दस्तक के साथ ही चार धाम यात्रा भी धीरे-धीरे कम होने लगी है बात करें पिछले हफ्ते तक की तो चार धाम यात्रा में इस बार बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुंचने से गत वर्षों के रिकॉर्ड टूटने शुरू हो गए थे ऐसे में सवाल भी उठने लगे कि चार धाम में क्राउड मैनेजमेंट किस तरह हो क्योंकि बड़ी संख्या में जब तीर्थयात्री और पर्यटक बद्री केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हो तो उनको मैनेज करने के लिए प्रशासन को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ।

बद्री केदार धाम में लगातार बढ़ रही भीड़ ने कई तरह के सवाल भी उठा दिए हैं , संत समाज मैं अब यह बात उठ ने लगी कि चार धाम यात्रा को तीर्थ यात्रा ही रहने दिया जाए जो धीरे-धीरे पर्यटन यात्रा का स्वरूप ले रही है जिसको लेकर संतों में भी नाराजगी है।

तेजी से टूरिस्ट स्पॉट बनते उत्तराखंड के धामों में  धार्मिक पर्यटन और टूरिज्म को लेकर अब संत समाज मुखर होने लगा है, संतो की मांग है कि सरकार अलग से  धार्मिक पर्यटन और पर्यटन के लिए अलग से मंत्रालय बनाए जिस से धामों की धार्मिक मान्यता बनी रहे और बेवजह की भीड ना बढ़े, ऋषिकेश में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने कहा कि संत समाज की चिंता है कि विश्व प्रसिद्ध धामों को पर्यटन की दृष्टि से देख कर वहा घूमने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है जिस से बद्री केदार जैसे धार्मिक धाम पिकनिक स्पॉट बनते जा रहे है सरकार को इस और गंभीरता से सोचना होगा। पर्यटन और धार्मिक पर्यटन को अलग दृष्टि से देखना होगा तीर्थयात्री केवल तीर्थ यात्रा करें और पर्यटक पर्यटन की दृष्टि से ही आवागमन करें जिससे धामों की पवित्रता बनी रहेगी और प्रशासन को भी तीर्थ यात्रियों को सुविधा देने में आसानी होगी, उत्तराखंड गवर्नमेंट को तुरंत ही धार्मिक पर्यटन और पर्यटन को अलग-अलग करते हुए दो मंत्रालय बनाने चाहिए जो दोनों की व्यवस्था सही ढंग से कर सके ।

 

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