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सीबीआई की कारवाही में तेजी

ऋषिकेश एम्स घोटाला _ AIIMS के एडिशनल प्रोफेसर समेत आठ पर मुकदमा, उपकरणों की खरीद में हुआ करोड़ों का घोटाला

 

रिपोर्ट _कृष्णा रावत डोभाल

ऋषिकेश, 24अगस्त

भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड का दावा करने वाली बीजेपी सरकार के शासनकाल में लगातार उत्तराखंड मे ऋषिकेश एम्स का नाम स्वास्थ्य सेवाओं से ज्यादा घोटाले के केंद्र के रूप में ज्यादा नजर आता है, नियम कायदे ताक पर रखकर खरीदारी में घोटाले पर घोटाले ऋषिकेश एम्स की नियति बन गए हैं हालांकि सीबीआई अपनी जांच प्रक्रिया में तेजी लाते हुए मुकदमा दर्ज कर के आगे की कार्रवाई में जुट गई है । अब खबर विस्तार से क्यों घोटाले एम्स ऋषिकेश का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं……..

आखिर क्या है घोटाला……

गौरतलब है कि पूर्व में ऋषिकेश एम्स में नियमों को ताक पर रख कर करोड़ों की खरीदारी की गई थी, इस मामले को लेकर सीबीआई में 21 अगस्त को अपराध निरोधक शाखा देहरादून में सीबीआई के एडिशनल एसपी सतीश कुमार राठी ने मुकदमा दर्ज कराया है। जिसमें बताया गया कि उपकरण खरीद में भारी वित्तीय अनियमितता की शिकायत के बाद CBI और अपराध निरोधक शाखा तथा एम्स के अधिकारियों ने 31 मार्च 2023 को जांच की थी।

सीबीआई की संयुक्त टीम की जांच में क्या निकला…..

जिसमें पता चला कि एम्स ऋषिकेश में उन्नत वेसल सीलिंग उपकरण की खरीद के लिए आठ जनवरी 2019 से 22 फरवरी 2019 के बीच टेंडर प्रक्रिया की गई थी। जिसमें एम्स ऋषिकेश में कार्यरत माइक्रोबायोलाजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर बलराम जी ओमर को खरीद अधिकारी और समन्वयक नियुक्त किया गया था।

सीबीआइ और संयुक्त टीम की जांच में यह बात सामने आई कि एम्स ऋषिकेश ने निविदा शर्तों को ताक पर रखते हुए कम बोली लगाने वाली आरोग्य इंटरनेशनल कंपनी से सात उन्नत वेसल सीलिंग उपकरण 55,38,312.70 रुपये प्रति यूनिट की दर से कुल 38,76,8188.93 रुपए में खरीदे थे।

जांच के बाद तेजी दिखाते हुए सीबीआई में दर्ज किया मुकदमे…….

जिसमें उन्नत वेसल सीलिंग उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया। इस मामले में एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी के अलावा उपकरण उपलब्ध कराने वाली दो कंपनियां तथा उनके अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी तथा लोक सेवक के लिए अनुचित लाभ प्राप्त करने संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

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