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ऋषिकेश में मतदाताओं का खेल

पिछले सालों की तुलना में ऋषिकेश शहरी क्षेत्र एक बार फिर निर्णायक, ग्रामीण क्षेत्रों से आपस में कट रहे है वोट , जातिगत समीकरण गड़बड़ाने की आशंका

रिपोर्ट_हरीश भट्ट

ऋषिकेश , पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार के विधानसभा चुनाव में ऋषिकेश सीट पर शहरी क्षेत्र के मतदाता निर्णायक स्थिति में है. ग्रामीण क्षेत्रों से एक तरफा मतदान होने की परंपरा को निभाते हुए लगभग हर बार हर प्रत्याशी का फोकस ग्रामीण क्षेत्र ही होता है. इस बार भी ऐसा ही हो रहा है. भाजपा-कांग्रेस या फिर आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड जनएकता पार्टी इनके प्रत्याशी भी शहर में कम और ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा प्रचार प्रसार पर ध्यान दे रहे हैं. आप के राजे सिंह नेगी और उजपा के कनक धनई तो आते ही ग्रामीण क्षेत्र से हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाने का दावा करने वाले विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल लगातार चौथी बार जीत के लिए शहरी क्षेत्र में कम ग्रामीण इलाकों में ज्यादा निर्भर रहे. ऋषिकेश वासी होने के बावजूद भी इनके बाहरी होने की बात भी लगातार उठते ही रहती है. कांग्रेस की जीत का सूखा खत्म करने का इरादा लिए कांग्रेस प्रत्याशी जयेंद्र रमोला शहरी क्षेत्र से आते हैं. इन चारों प्रत्याशियों के समर्थन में स्टार प्रचारकों के ताबड़तोड़ कैंपेन के बाद फाइनल मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही है. दिलचस्प होते जा रहे इस मुकाबले में जहां ग्रामीण क्षेत्र मत इन चारों प्रत्याशियों में विभाजित होता दिखाई दे रहा है, वही शहरी क्षेत्र का मत सिर्फ दो भागों में भाजपा और कांग्रेस में ही बंटेगा. यहां पर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रेमचंद अग्रवाल भाजपा की संगठन शक्ति पर भरोसा कर रहे हैं तो कांग्रेस के जयेंद्र रमोला अपने और अपने समर्थकों के व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर है. कांग्रेस या भाजपा दोनों ही पार्टियों में भितरघात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार ऋषिकेश विधानसभा सीट पर शहरी क्षेत्र का मतदाता ही निर्णायक की भूमिका निभाएगा.

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