देहरादून में वैली ऑफ़ वर्डस और साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित साहित्य स्पृहा का हुआ सफल समापन
रिपोर्ट — कृष्णा रावत डोभाल
देहरादून — वेलहम स्कूल में वैली ऑफ़ वर्डस और साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित साहित्य स्पृहा का रविवार को सफल समापन हुआ। 22 और 23 अगस्त को कुल 13 सत्रों में से 7 पुस्तक चर्चा और कवि सम्मेलन पहले दिन, और 5 चर्चा सत्र दूसरे दिन आयोजित किए गए।रविवार को देवेन्द्र मेवाड़ी की पुस्तक ‘यायावर की यादें’ पर सुशील उपाध्याय के साथ चर्चा में लेखक ने अपने बचपन, जीवन, साहित्य यात्रा इत्यादि पर प्रकाश डाला।
कुमारी रोहिणी के अनूदित उपन्यास, बुकर पुरस्कार विजेता ‘ऑर्बिटल’ पर सोमेश्वर पांडेय ने चर्चा की। इसमें टीम वर्क, समाज, राजनीति इत्यादि कई बिंदुओं पर चर्चा की गई।
मुज्तबा ख़ान की उपन्यासिका ‘पानदान’ पर लेखक ने अंजुम शर्मा के साथ चर्चा में ‘पानदान’ की कहानी के साथ ही हिन्दुस्तानी ज़बान के उच्चारण पर भी दिलचस्प बातचीत की।
नवनीत नीरव की युवा वयस्कों की पुस्तक ‘नाच’ पर शैलेन्द्र कान्त से चर्चा में लेखक ने लिंगभेद, सामाजिक रूढ़ियों, पहचान इत्यादि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
अंतिम सत्र में शुचिता मीतल से ‘डाकिनी’ के अनुवाद पर सचिन चौहान ने स्त्रीवाद, समकालीन समाज, अनुवाद की कला आदि पर चर्चा की।
समापन सत्र में लक्ष्मी शंकर बाजपाई ने साहित्य के योगदान, सुधा रानी पाण्डेय ने संस्कृत साहित्य के योगदान पर प्रकाश डाला और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
संजीव चोपड़ा ने VoW टीम और वेलहम टीम के प्रयासों को सराहा। वेलहम की प्राचार्या विभा कपूर ने इस आयोजन को स्कूल के लिए अद्वितीय अनुभव बताया। साथ ही अगले वर्ष भी ‘साहित्य स्पृहा’ के दूसरे संस्करण के आयोजन की इच्छा व्यक्त करते हुए आयोजन का समापन किया।



