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17 को हरिद्वार में गूंजेगी वन भूमि , मलिन बस्तियों की आवाज

 

 

 

 

 

 

 

रिपोर्ट — कृष्णा रावत डोभाल

 

उत्तराखंड में वन अधिकार कानून 2006 को लागू करने तथा वन‌भूमि पर बसे सभी लोगों को मालिकाना हक दिये जाने, 2016 का मालिन बस्ती अधिनियम पर अमल करने तथा किसी भी व्यक्ति को बेदखल किए जाने से पूर्व उसकी सहमति के साथ उसका पुनर्वास सुनिश्चित किये जाने आदि मांगों को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा आगामी 17 फरवरी को सैनी धर्मशाला हरिद्वार में जन सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

 

इस सम्मेलन में जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समिति द्वारा कुनाऊ, बापू ग्राम ऋषिकेश व हरिद्वार में जन संपर्क किया गया।

 

इस दौरान समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने कहा कि हाउजिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क (HLRN) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से 2023 के बीच देश में 17 लाख से अधिक लोगों को उनके आवास और रोज़गार से बलपूर्वक बेदखल किया गया है और 1.70 करोड़ से भी ज्यादा लोग अभी भी बेदखली और विस्थापन के खतरे में जीवनयापन कर रहे हैं। अतः उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश की जनता को एक मंच पर आकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की जरूरत है।

 

उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लोगों के घर तोड़ने की कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के बेदखली और विस्थापन के बुनियादी सिद्धांत और दिशानिर्देश (2007) का खुला उल्लंघन है। जिसमें कहा गया है कि बेदखली तभी होगी जब सभी व्यवहार्य विकल्प समाप्त हो जाएं और बेदखली से पूर्व ही सभी प्रभावितों के लिए पर्याप्त पुनर्वास की योजना तैयार एवं लागू की जाएगी। भारत सरकार संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता होने के वाबजूद भी इसका अनुपालन नहीं कर रही है और बुल्डोजर चलाकर लोगों को बेदखल कर रही है।

 

वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष तरुण जोशी ने कहा कि वनाधिकार कानून 2006 वन भूमि पर निवास कर रही जनता को राजस्व ग्राम बनाने व 4 हैक्टेयर भूमि पर मालिकाना का अधिकार देता है परंतु सरकार इस कानून का उल्लंघन कर गैर कानूनी तरीके से लोगों को बेदखल कर रही है। उन्होंने क्षेत्र की जनता से 17 फरवरी को हरिद्वार में आयोजित जन सम्मेलन में शामिल होने की अपील की है।

जन संपर्क में बसंत पांडे, मौ. शफी, आषुतोष कोठारी, मुनीष कुमार और तरुण जोशी आदि शामिल रहे।

 

 

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